आज किताब से बात हुई
वर्षो बाद जब आज किताब खोली, तो किताब बोली
आखिर क्यों खोली तूने आज,
क्या हैं इसके पीछे का राज,
मैने कहा कि अध्यापिका के सवाल का ना दे पाया जवाब
तो वो हो गई मुझसे नाराज़,
बस इसलिए मैने तू खोली हैं आज
वो बोली, अरे ये भी कोई वजह हुए,
इसमें कोनसी तुझे कोई सजा हुए,
अगर होती हैं नाराज तो होने दे,
तू भी चैन से सो, और मुझे भी सोने दे
मैं बोला बात तो तेरी सही हैं,
उस अध्यापिका के लिए कोनसी ये बात नई हैं,
पहले भी वो एक बार हुए थी नाराज,
जब मेरे 100 में से नंबर आए थे चार,
उस समय वो इतने तेज चिल्लाई थी,
घर मेरा स्कूल के पास था, तो घर तक आवाज़ आई थी,
और फिर घर आ कर, बाबूजी ने आहा क्या पिटाई लगाई थी
फिर थोड़ी देर सोचने के बाद,
एक ख्याल दिमाग में आया, की इस बार कही अध्यापिका भी crush के सामने कर ना दे पिटाई,
मैने बहुत सारी हिम्मत जुटाई,
और एक बार फिर से किताब उठाई
उससे फिर से ना पढ़ने की अनगिनत बजह बताई,
और मेरी नासमझ पर थोड़ी सी नाराज़गी जताई,
क्यू नही समझता मेरी बात,
चल इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के साथ, बिता दे आज की भी रात,
चल मान लें उसने तुझे डांट भी दिया,
अरे बुद्धू, वो तुझे अपना मानती हैं तभी तो उसने ऐसा किया,
और अब क्यू मौन है खड़ा,
आज की दुनिया में, बस मां - बाप और शिक्षक ही चाहते हैं, उनका बेटा या विद्यार्थी करे कुछ बड़ा,
जब मेने ये शब्द सुने, कुछ अजीब सा अहसास हुआ,
तुरंत नींद से जागा,
अपनी किताबों की अलमीरा की ओर भागा,
इस बार ख्वाव नही, हकीकत में किताब खोली,
इत्तफाक देखिए, वो इस बार भी यही बोली, जनाब आखिर आज मैं क्यों खोली??
ये शब्द सुनते ही, उससे नजरे चुराने लगा, आंखे मेरी नम हो गई,
वो भी मेरी खामोशियों को समझ गई,
और एक बार फिर शांत स्वर में बोली -
क्या हुए बात, मैं हूं ना तेरे साथ,मैं हूं ना तेरे साथ😉