Verses
where emotions become words

Anuj Singh
आंसू ना गिरे आंख से, तो इश्क कैसा तड़प मिट जाए जाम से, तो इश्क कैसा वो कहते हैं मुद्दतें लग गई उन्हें भुलाने में अरे मियां अगर भूल गए, तो इश्क कैसा!
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कौन है आप?

Anuj Singh
अगर माँ दिल हैं तो धड़कन हैं बाप, अगर माँ दिन हैं तो रात हैं बाप, अगर माँ घर हैं तो संसार है बाप, अगर माँ को पार्वती कहते हो तो शंकर हैं बाप, अगर माँ शरीर हैं तो साया हैं बाप, जिंदगी के दो पहलू में एक अगर माँ हैं तो दूसरा पहलू हैं बाप, फिर बच्चे बड़े होकर उसी शख्स से पूछते हैं "कौन हैं आप”??
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Anuj Singh
हुस्न भी है, मासूमियत भी कमाल रखती है, हर छोटी-सी बात पर सौ सवाल रखती है। दुनिया की समझ अभी शायद थोड़ी कम है उसे, मगर अपनी नादानियों से मेरा ख़याल रखती है।
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हम शिव के दीवाने हैं

Anuj Singh
हम भिक्षुक भी, हम संहारक भी, हम करुणा भी, हम हुँकार भी। हम शिव के वो दीवाने हैं, जो संकट से करें ललकार भी। हम भस्म रमाएँ माथे पर, पर आँखों में अंगार लिए। हम रुद्र-वंश के साधक हैं, सीने में ज्वाला अपार लिए। हम झुकते हैं शिव चरणों में, बाकी हर अभिमान झुकाते हैं। जो धर्म पे दृष्टि उठाता है, हम उसको सत्य दिखाते हैं। हम गंगा जैसे निर्मल भी, हम प्रलय का प्रचंड प्रवाह भी। हम भोले की मुस्कान भी, हम रौद्र तांडव की चाह भी। हम डमरू की वह गूँज हैं, जिससे सोया साहस जागे। हम त्रिशूल की वह धार हैं, जिससे अधर्म का मस्तक भागे। हम कैलाशों की शीतलता, हम रणभूमि की ज्वाला हैं। हम शिव के ऐसे भक्त नहीं, हम शिव के जीते-जागते भाला हैं। हम नंदी का अटूट धैर्य, हम वीरभद्र का क्रोध भी हैं। हम मौन तपस्या की सीमा, हम युद्धों का उद्घोष भी हैं। जो राख समझकर ठुकराए, वही राख ज्वालामुखी होगी। जो रुद्र-भक्त को ललकारे, उसकी हर साँस अधूरी होगी। हम शब्द नहीं, हुंकार हैं, हम साँस नहीं, तलवार हैं। हम शिव की तीसरी आँख का, धरती पर चलता अवतार हैं। हर बूंद सावन की कहती है— अब रुद्रत्व को स्वीकार करो। महादेव के वीर सपूतो, अन्याय पर प्रहार करो। जब तक नभ में बादल होंगे, जब तक गंगा की धार रहे, जब तक कैलाश अडिग खड़ा, तब तक "हर-हर महादेव" की ललकार रहे!
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हूँ मैं...

Anuj Singh
न माथे पर भय की रेखा है, न आँखों में कोई हार हूँ मैं, महादेव की ज्वाला से जन्मा, **रुद्र का एक अंगार हूँ मैं।** हूँ मैं... भस्म लगाकर चलता हूँ, शिव नाम ही मेरा श्रृंगार है, काल भी जिसके चरणों में झुके, वो मेरे भोलेनाथ का दरबार है। ना धन का कोई अभिमान मुझे, ना सिंहासन की दरकार है, मेरे लिए तो हर रणभूमि ही, महादेव का उपहार है। हूँ मैं... जिसने पर्वत उठा लिया था, जिसने सागर पार किया था, राम नाम को हृदय में रखकर, जिसने असंभव साकार किया था। उस बजरंगी की भक्ति का, एक छोटा सा संसार हूँ मैं, बल, बुद्धि और भक्ति का, जीता-जागता आधार हूँ मैं। हूँ मैं... जिसके नाम से भय मिट जाता, जिसके स्मरण से शक्ति आती है, उस रघुनंदन के चरणों की, भक्ति ही मेरी थाती है। हनुमत के उस साहस का, एक छोटा सा विस्तार हूँ मैं, राम नाम की शक्ति लिए, अडिग खड़ा एक विचार हूँ मैं। हूँ मैं... मेरी नस-नस में शिव का नाम है, मेरे रोम-रोम में विश्वास है, मेरे हर कर्म के पीछे, महादेव का ही आशीर्वाद है। जब रुद्र रूप जागेगा मेरा, तो गूँजेगा पूरा संसार, मेरे कदमों की आहट में, होगा रण का भयंकर नाद। हूँ मैं... मैं वो अग्नि नहीं जो बुझ जाए, मैं वो ज्वाला हूँ अपार हूँ मैं, जिसे समय भी मिटा न पाए, ऐसा अमर विचार हूँ मैं। ना झुकूँगा, ना रुकूँगा, ये मेरा अटल प्रण है, शिव का भक्त, बजरंग का सेवक, यही मेरी पहचान है। हूँ मैं... जब रण में मेरा शंख बजेगा, तो डर का होगा संहार, जब धर्म के लिए कदम उठेंगे, तो होगा रुद्र का प्रहार। लिख देना इतिहास के पन्नों पर, एक अटल ये स्वीकार हूँ मैं... महादेव की भक्ति का योद्धा, बजरंग के बल का विस्तार हूँ मैं। हूँ मैं...
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वो राम थे!

Anuj Singh
बाण चलाया तो अधर्म मिटाने, धनुष उठाया तो धर्म बचाने। पर हाथ बढ़ाया हर बार उन्होंने, टूटे हुए इंसान उठाने। ना क्रोध रखा, ना द्वेष रखा, हर मन में अपना स्थान लिखा। मर्यादा की उस पावन धरती पर, राम ने जीवन का ज्ञान लिखा। वो राम थे... राज मिला तो त्याग किया, वन मिला तो वचन निभाया। काँटों को भी फूल समझकर, हँसते-हँसते पथ अपनाया। ना सुख माँगा, ना मान माँगा, ना अपने लिए सम्मान माँगा। बस जन-जन के कल्याण की खातिर, जीवन भर भगवान सा त्याग निभाया। वो राम थे... शबरी के बेरों में प्रेम देखा, सूखे पत्तों में भाव देखा। जिसे जग ने छोटा समझा था, उस भक्त में भगवान देखा। ना धन देखा, ना रूप देखा, ना कोई ऊँचा-नीचा लेखा। जहाँ प्रेम की गंगा बहती थी, वहीं राम ने अपना देखा। वो राम थे... केवट की नाव किनारे थी, आँखों में भक्ति की धारा थी। छोटा था घर उसका लेकिन, दिल में अयोध्या सारी थी। जिसने चरणों को धोया था, राम ने उसको गले लगाया। एक भक्त के छोटे प्रेम को, राजमहल से बड़ा बताया। वो राम थे... जटायु गिरे रणभूमि में, तन घायल था, मन अडिग था। सीता माता की रक्षा खातिर, उनका हर एक श्वास समर्पित था। राम ने आँसू रोक न पाए, उस बलिदान को शीश झुकाया। एक पक्षी में पिता का दर्शन, रघुवर ने संसार को सिखाया। वो राम थे... --- समुद्र मिला तो धैर्य रखा, पर्वत आया तो साहस दिखाया। प्रकृति के हर एक कण में, राम ने अपना प्रेम पाया। ना क्रोध में मर्यादा छोड़ी, ना शक्ति में अभिमान किया। शत्रु के अंतिम क्षण में भी, मानवता का सम्मान किया। वो राम थे... --- भाई मिला तो प्रेम दिया, वियोग मिला तो धैर्य रखा। हर रिश्ते की पावनता का, राम ने सच्चा अर्थ लिखा। भरत के प्रेम को माथे लगाया, लक्ष्मण का साथ निभाया। रिश्तों की इस पावन गंगा को, राम ने जग में बहाया। वो राम थे... --- जिस दिन तक सत्य रहेगा, जिस दिन तक सम्मान रहेगा। जिस दिन तक प्रेम की भाषा में, इंसान का इंसान रहेगा। उस दिन तक हर धड़कन बोलेगी, हर कण यही फरमाएगा— जिसने भगवान होकर भी, मानव बनकर जीवन बिताया... वो राम थे... वो राम हैं... और युगों-युगों तक... वो राम ही कहलाएंगे। जय श्रीराम!
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Dosti

Mera Safar
दोस्ती - दोस्ती - क्या है दोस्ती ? उसके हर झूठ को छुपाना है दोस्ती। उसके बिना कहे उसके मन की बात को जान लेना है दोस्ती।। सिर्फ खुशी के पल बांटना नहीं है दोस्ती। उसके ग़म की नांव को पार लगाना है दोस्ती।। इल्जाम भी बहुत लगेंगे दोस्ती पर। उनको पैरों से कुचल के जाना है दोस्ती।। नाराजगी तो अपनो से ही होती है। उसको भुला के आपस को गले लगाना है दोस्ती।। वर्षों तक न मिल पाने के बाद भी। रोज मिलते हों उस भाव को दर्शाती है दोस्ती।। मन में कोई चुभक भी हो उसे भुलाकर गले मिलाती है दोस्ती।। अंत में यही कहना चाहता हूँ कि दोस्ती एक अदृश्य अटूट प्रेम का भाव है।।
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क्या किया हैं आपने?

Anuj Singh
तेरे लिए मंदिर में नारियल चढ़ाया, मज्ज्जिद तक में नमाज़ अदा की उस बाप ने, तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने ? कम पड़े कुछ पैसे तेरी पैदाइश के वक्त , तो पगड़ी तक रख दी जमीदार के पाओ में उस बाप ने, तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने ? पीड़ा सहकर ९ माह रखा गर्भ में मां ने, और ज़हन में रखा तुझे उस बाप ने, तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने ? हर जन्मदिवस ला कर दिया नया कुर्ता तुझे, और चंद लिवाजो में जिंदगी गुजारी उस बाप ने, तू पूछ रहा उनसे क्या किया हैं आपने ? पैसे बचाने के लिए पैदल तय किया सफ़र मिलो का, तेरे पाव नंगे ना पड़ने दिए ज़मीन पर उस बाप ने, तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने ? धूप सही, सर्दी सही, खड़ा रहा ढाल बन कर तेरी खातिर तूफानों तक का रुख मोड़ दिया उस बाप ने तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने? तेरी बीमारी में जब दवा काम नहीं कर रही थी तो मंदिर, मज्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे में भेट चढाई उस बाप ने तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने? तुझे पढाने लिखाने के खातिर, रातों रात मेहनत मजदूरी की उस बाप ने तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने? तेरे शौक़ पूरे करते करते, अपने सारे शौक़ मार दिए उस बाप ने तू पूछ रहा हैं उनसे क्या किया हैं आपने? सब्र रख तू भी एक दिन किसी का बाप होगा तब अहसास होगा की क्या क्या किया हैं उस बाप ने जब तेरी औलाद तुझसे पूछेगी क्या किया हैं आपने?
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महादेव

Anuj Singh
मस्तक पर चंद्र,गले सर्प माला! एक हाथ में त्रिशूल,केशो का रंग काला! ऐसा मेरे महादेव का रूप निराला नंदी की सवारी, डमरू धारी और जटाओं में गंग है, मैं काल से भी क्या डरू जब मेरे महादेव मेरे संग हैं।
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Anuj Singh
मन्नत पूरी ना हुई तो दर बदल लिया हल्का सा डांट क्या दिया बाप ने, बेटे ने घर बदल लिया!!
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