अब वो बचपन वाली बात नहीं है
भीड़ तो काफ़ी हैं आस पास
मगर सच में कोई साथ नहीं हैं
अब वो बचपन वाली बात नहीं है
लाखो हाथ हैं तुम्हें गिराने के लिए
कोई संभालने वाला हाथ नहीं है
अब वो बचपन वाली बात नहीं है
दिन तो फिर भी थोड़ा बहुत ठीक निकल जाता हैं
लेकिन वो पहले जैसी रात नही हैं
अब वो बचपन वाली बात नही हैं
पहले सच मे हस्ते और रोते थे
चेहरे पर अब असल मुस्कुराहट नही हैं
अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं
पहले गलतियां भी नादानियां होती थी
अब लोगो को मेरे मज़ाक में भी नज़र आता मज़ाक नहीं हैं
अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं
सोचते थे, बड़े हो जाएंगे तो जिंदगी मस्त गुजरेगी
गुजर तो रही हैं, लेकिन मस्ती साथ नहीं हैं
अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं