Verses a verse, kept

अब वो बचपन वाली बात नहीं है

भीड़ तो काफ़ी हैं आस पास मगर सच में कोई साथ नहीं हैं अब वो बचपन वाली बात नहीं है लाखो हाथ हैं तुम्हें गिराने के लिए कोई संभालने वाला हाथ नहीं है अब वो बचपन वाली बात नहीं है दिन तो फिर भी थोड़ा बहुत ठीक निकल जाता हैं लेकिन वो पहले जैसी रात नही हैं अब वो बचपन वाली बात नही हैं पहले सच मे हस्ते और रोते थे चेहरे पर अब असल मुस्कुराहट नही हैं अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं पहले गलतियां भी नादानियां होती थी अब लोगो को मेरे मज़ाक में भी नज़र आता मज़ाक नहीं हैं अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं सोचते थे, बड़े हो जाएंगे तो जिंदगी मस्त गुजरेगी गुजर तो रही हैं, लेकिन मस्ती साथ नहीं हैं अब वो बचपन वाली बात नहीं हैं
— Anuj Singh
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