Verses a verse, kept

हूँ मैं...

न माथे पर भय की रेखा है, न आँखों में कोई हार हूँ मैं, महादेव की ज्वाला से जन्मा, **रुद्र का एक अंगार हूँ मैं।** हूँ मैं... भस्म लगाकर चलता हूँ, शिव नाम ही मेरा श्रृंगार है, काल भी जिसके चरणों में झुके, वो मेरे भोलेनाथ का दरबार है। ना धन का कोई अभिमान मुझे, ना सिंहासन की दरकार है, मेरे लिए तो हर रणभूमि ही, महादेव का उपहार है। हूँ मैं... जिसने पर्वत उठा लिया था, जिसने सागर पार किया था, राम नाम को हृदय में रखकर, जिसने असंभव साकार किया था। उस बजरंगी की भक्ति का, एक छोटा सा संसार हूँ मैं, बल, बुद्धि और भक्ति का, जीता-जागता आधार हूँ मैं। हूँ मैं... जिसके नाम से भय मिट जाता, जिसके स्मरण से शक्ति आती है, उस रघुनंदन के चरणों की, भक्ति ही मेरी थाती है। हनुमत के उस साहस का, एक छोटा सा विस्तार हूँ मैं, राम नाम की शक्ति लिए, अडिग खड़ा एक विचार हूँ मैं। हूँ मैं... मेरी नस-नस में शिव का नाम है, मेरे रोम-रोम में विश्वास है, मेरे हर कर्म के पीछे, महादेव का ही आशीर्वाद है। जब रुद्र रूप जागेगा मेरा, तो गूँजेगा पूरा संसार, मेरे कदमों की आहट में, होगा रण का भयंकर नाद। हूँ मैं... मैं वो अग्नि नहीं जो बुझ जाए, मैं वो ज्वाला हूँ अपार हूँ मैं, जिसे समय भी मिटा न पाए, ऐसा अमर विचार हूँ मैं। ना झुकूँगा, ना रुकूँगा, ये मेरा अटल प्रण है, शिव का भक्त, बजरंग का सेवक, यही मेरी पहचान है। हूँ मैं... जब रण में मेरा शंख बजेगा, तो डर का होगा संहार, जब धर्म के लिए कदम उठेंगे, तो होगा रुद्र का प्रहार। लिख देना इतिहास के पन्नों पर, एक अटल ये स्वीकार हूँ मैं... महादेव की भक्ति का योद्धा, बजरंग के बल का विस्तार हूँ मैं। हूँ मैं...
— Anuj Singh
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