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इश्क़ या पागलपन

उसे देखे बगैर नींद कहा आती हैं, और देखकर उसको नींद उड़ जाती हैं इसे इश्क कहूं या पागलपन उससे कहना तो बहुत कुछ चाहता हूं, मगर सामने जब वो आए तो सबकुछ भूल जाता हूं, इसे इश्क कहूं या पागलपन वैसे तो हर वक्त उसी की तरफ ध्यान रहता हैं, और वो देख ले तो नजरे चुराता हूं इसे इश्क कहूं या पागलपन ख्वाहिश तो हैं उसे अपना बनाने की, मगर उसे खो देने के डर से, कहा उसे ये सब बता पाता हूं, इसे इश्क कहूं या पागलपन उससे आज तक ढंग से बात नही हुई, फिर भी मन ने उसे अपना मान लिया हैं इसे इश्क कहूं या पागलपन
— Anuj Singh
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