anger महादेव मस्तक पर चंद्र,गले सर्प माला! एक हाथ में त्रिशूल,केशो का रंग काला! ऐसा मेरे महादेव का रूप निराला नंदी की सवारी, डमरू धारी और जटाओं में गंग है, मैं काल से भी क्या डरू जब मेरे महादेव मेरे संग हैं। — Anuj Singh ← All verses Share