Dosti
दोस्ती -
दोस्ती - क्या है दोस्ती ?
उसके हर झूठ को छुपाना है दोस्ती।
उसके बिना कहे उसके मन की बात को जान लेना है दोस्ती।।
सिर्फ खुशी के पल बांटना नहीं है दोस्ती।
उसके ग़म की नांव को पार लगाना है दोस्ती।।
इल्जाम भी बहुत लगेंगे दोस्ती पर।
उनको पैरों से कुचल के जाना है दोस्ती।।
नाराजगी तो अपनो से ही होती है।
उसको भुला के आपस को गले लगाना है दोस्ती।।
वर्षों तक न मिल पाने के बाद भी।
रोज मिलते हों उस भाव को दर्शाती है दोस्ती।।
मन में कोई चुभक भी हो उसे भुलाकर गले मिलाती है दोस्ती।।
अंत में यही कहना चाहता हूँ कि दोस्ती एक अदृश्य अटूट प्रेम का भाव है।।