Verses a verse, kept

वो राम थे!

बाण चलाया तो अधर्म मिटाने, धनुष उठाया तो धर्म बचाने। पर हाथ बढ़ाया हर बार उन्होंने, टूटे हुए इंसान उठाने। ना क्रोध रखा, ना द्वेष रखा, हर मन में अपना स्थान लिखा। मर्यादा की उस पावन धरती पर, राम ने जीवन का ज्ञान लिखा। वो राम थे... राज मिला तो त्याग किया, वन मिला तो वचन निभाया। काँटों को भी फूल समझकर, हँसते-हँसते पथ अपनाया। ना सुख माँगा, ना मान माँगा, ना अपने लिए सम्मान माँगा। बस जन-जन के कल्याण की खातिर, जीवन भर भगवान सा त्याग निभाया। वो राम थे... शबरी के बेरों में प्रेम देखा, सूखे पत्तों में भाव देखा। जिसे जग ने छोटा समझा था, उस भक्त में भगवान देखा। ना धन देखा, ना रूप देखा, ना कोई ऊँचा-नीचा लेखा। जहाँ प्रेम की गंगा बहती थी, वहीं राम ने अपना देखा। वो राम थे... केवट की नाव किनारे थी, आँखों में भक्ति की धारा थी। छोटा था घर उसका लेकिन, दिल में अयोध्या सारी थी। जिसने चरणों को धोया था, राम ने उसको गले लगाया। एक भक्त के छोटे प्रेम को, राजमहल से बड़ा बताया। वो राम थे... जटायु गिरे रणभूमि में, तन घायल था, मन अडिग था। सीता माता की रक्षा खातिर, उनका हर एक श्वास समर्पित था। राम ने आँसू रोक न पाए, उस बलिदान को शीश झुकाया। एक पक्षी में पिता का दर्शन, रघुवर ने संसार को सिखाया। वो राम थे... --- समुद्र मिला तो धैर्य रखा, पर्वत आया तो साहस दिखाया। प्रकृति के हर एक कण में, राम ने अपना प्रेम पाया। ना क्रोध में मर्यादा छोड़ी, ना शक्ति में अभिमान किया। शत्रु के अंतिम क्षण में भी, मानवता का सम्मान किया। वो राम थे... --- भाई मिला तो प्रेम दिया, वियोग मिला तो धैर्य रखा। हर रिश्ते की पावनता का, राम ने सच्चा अर्थ लिखा। भरत के प्रेम को माथे लगाया, लक्ष्मण का साथ निभाया। रिश्तों की इस पावन गंगा को, राम ने जग में बहाया। वो राम थे... --- जिस दिन तक सत्य रहेगा, जिस दिन तक सम्मान रहेगा। जिस दिन तक प्रेम की भाषा में, इंसान का इंसान रहेगा। उस दिन तक हर धड़कन बोलेगी, हर कण यही फरमाएगा— जिसने भगवान होकर भी, मानव बनकर जीवन बिताया... वो राम थे... वो राम हैं... और युगों-युगों तक... वो राम ही कहलाएंगे। जय श्रीराम!
— Anuj Singh
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