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क्या?

जो खूबसूरत जिंदगी मेने अकेले जीने की सोची हैं, क्या उस जिंदगी का हिस्सा बनोगी? क्या मेरे साथ केदारनाथ चलोगी? थोड़ा सा शर्मिला हूं मैं, कितनी मोहब्बत हैं तुमसे शायद तुम्हे बता ना पाऊं, इश्क तो बेपनाह हैं तुमसे शायद तुम्हारे सामने जता ना पाऊं, क्या बिन बताए ही समझ जाओगी? क्या मुझ नासमझ को तुम अपना पाओगी? तुम्हारे बदन को छूना तो बहुत बड़ी बात हैं, मैं तो तुम्हारे देखने मात्र से डर जाता हूं, क्या मेरे इस डर को खत्म करोगी? केदारनाथ दूर हैं थोड़ा, तो केदारनाथ ना सही क्या मेरे साथ खेरेश्वर महादेव चलोगी? इतनी बारीकिओ से जानता हूं तुम्हे कि, आंखें बंद करके भी तुम्हारी तस्वीर बना सकता हूं, बहुत छोटा ब सरल लड़का हूं, और उतनी ही छोटी मेरी दुनिया क्या मेरी इस छोटी सी दुनियां कि जिंदगी बनोगी? क्या तुम भी मुझे थोड़ा सा जानने कि कोशिश करोगी?
— Anuj Singh
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