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महाकाल 🔱

प्रसन्नमुख, नीलकंठ, कान कुण्डल, नेत्र विशाल हैं गले सर्प, चंद्रमा ललाट पर, काल के भी काल हैं वही भूत, वर्तमान वही,वही भविष्य काल हैं शून्य हैं, अनंत हैं, अदृश्य हैं,और विकराल हैं परब्रह्म, परमात्मा, परमेश्वर, सब महाकाल हैं!!
— Anuj Singh
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