मैं और वो
मैं भक्त महाकाल का,
वो कृष्ण की दीवानी हैं!
मेरी सब कुछ हैं गौरा मैया,
उसने सिर्फ राधा माँ मानी हैं!
मैं सुबह शाम करू जप महामृत्युंजय मंत्र का,
उसकी ज़ुवान पर हर समय बस राधा रानी हैं!
मैं चाहता हूं वो मेरे साथ केदारनाथ चले,
मगर उसने वृंदावन, बरसाना जाने की ठानी हैं!
मेरी आख़िरी इच्छा हैं कि शिव को देखूं,
उसको निधिवन रात बितानी हैं!
मेरा मन नाचता हैं शिव तांडव सुन के,
उसे बांसुरी कि धून पर अपनी पायल खनखानी हैं!
मैं भक्त महाकाल का, वो कृष्ण की दीवानी हैं!!