एक तरफा मोहब्बत
ये बात वर्षो पुरानी हैं
मेरी एक तरफा मोहब्बत की काहनी हैं,
जब इन आंखो को उसका दीदार हुआ था,
पहली दफा हमे भी किसी से प्यार हुआ था,
साहस नहीं था इज़हार का,
क्योंकि मन में डर था उसके इंकार का,
उसकी एक झलक को तरसते थे,
उसे देख कर ना जाने क्यूं आंसू बरसते थे,
हर समय सिर्फ उन्ही के ख्वाव बुनते थे,
सर्द रातों में छत पर बैठे तारे गिनते थे!!